छोड़ दो, जीवन यों न मलो। 
ऐंठ अकड़ उसके पथ से तुम 
रथ पर यों न चलो। 

वह भी तुम-ऐसा ही सुंदर, 
अपने दुख-पथ का प्रवाह खर, 
तुम भी अपनी ही डालों पर 
फूलो और फलो। ...और पढ़ें
26 minutes ago
                                                                           ज़मीं पे इंसाँ ख़ुदा बना था वबा से पहले 
वो ख़ुद को सब कुछ समझ रहा था वबा से पहले 

पलक झपकते ही सारा मंज़र बदल गया है 
यहाँ तो मेला लगा हुआ था वबा से पहले 

तुम आज हाथों से दूरियाँ नापते हो सोचो 
दिलो...और पढ़ें
26 minutes ago
                                                                           हम चराग़ों की मदद करते रहे
और उधर सूरज बुझा डाला गया
- मनीश शुक्ला


कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न
ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
- मुज़फ़्फ़र वारसी ...और पढ़ें
26 minutes ago
                                                                           'विभूति' को कई अर्थों में प्रयुक्त किया जाता है, जैसे- वैभव, ऐश्वर्य या धन, संपत्ति, या दिव्य अलौकिक शक्ति से संपन्न गुणवान पुरुष। अमर उजाला हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- विभूति। प्रस्तुत है महादेवी वर्मा की कविता: इस पथ से आन...और पढ़ें
                                                
7 hours ago
                                                                           दुनिया में कहीं न कहीं 
कुछ न कुछ ऐसा घट रहा है
जो वक़्त-बेवक्त पहुँच ही जाएगा यहाँ तक।

सर्द हवाएं चली आएंगी बसंत के फूलों को बर्बाद करने
या शायद गर्मी उन्हें झुलसाने आ जाए।
बिना कागजात, बिना पासपोर्ट आ जाएगा...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           हमें कहां मालूम था कि इश्क़ होता क्या है
बस, एक तुम मिले और ज़िंदगी मुहब्बत बन गई

ज़िंदगी ने सवालात बदल डाले 
वक़्त ने हालात बदल डाले
हम तो आज भी वहीं हैं जो कल थे
बस लोगों ने अपने ख़्यालात बदल डाले
 ...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           कैफ़ी आज़मी जब भी मुशायरों में आते थे तो लोगों की दाद नहीं रुकती थी। वह प्रगतिशील लेखक संघ के सदस्य थे और समाज को लेकर अपनी लेखनी मुखर रखते थे। कम्युनिस्ट पार्टी का सदस्य बनने के बाद वह उन्हीं के बनाए कम्यून में रहा करते थे। वहीं शबाना और बाबा का जन्...और पढ़ें
                                                
20 hours ago
                                                                           मेरे मित्र की कार बँगले में घुसी तो उतरते हुए मैंने पूछा, 'इनके यहाँ कुत्ता तो नहीं है?' मित्र ने कहा, 'तुम कुत्ते से बहुत डरते हो!' मैंने कहा, 'आदमी की शक्ल में कुत्ते से नहीं डरता। उनसे निपट लेता हूँ। पर सच्चे कुत्ते से बहुत डरत...और पढ़ें
                                                
20 hours ago
                                                                           मिला कर ख़ाक में फिर ख़ाक को बर्बाद करते हैं
ग़रीबों पर सितम क्या किया सितम-ईजाद करते हैं

हज़ारों दिल जला कर ग़ैर का दिल शाद करते हैं
मिटा कर सैकड़ों शहर एक घर आबाद करते हैं

मोअज़्ज़िन को भी वो सुनते नहीं न...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           यूँ तो वो हर किसी से मिलती है 
हम से अपनी ख़ुशी से मिलती है 

सेज महकी बदन से शर्मा कर 
ये अदा भी उसी से मिलती है 

वो अभी फूल से नहीं मिलती 
जूहिए की कली से मिलती है ...और पढ़ें
20 hours ago
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